क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (AECOPD) के तीव्र उभार रोगियों और स्वास्थ्य प्रणाली के लिए महत्वपूर्ण चुनौतियाँ प्रस्तुत करते हैं, जिनमें बढ़ी हुई मृत्युदर, लंबित अस्पताल में भर्ती और उच्च लागत शामिल हैं। इस अर्द्ध-प्रयोगात्मक अध्ययन में मन्सूरा मेन यूनिवर्सिटी अस्पताल में 60 वयस्क AECOPD मरीजों में क्लिनिकल पाथवे के प्रभाव का आकलन किया गया। मरीजों को क्लिनिकल पाथवे समूह (CP, n=30) या सामान्य देखभाल समूह (non-CP, n=30) में असाइन किया गया। प्रमुख परिणामों में ICU में रहने की अवधि, दम घुटने और चिंता के स्कोर, पल्मोनरी फ़ंक्शन परीक्षण, और आर्टेरियल ब्लड गैस (ABG) पैरामीटर शामिल थे। CP समूह ने गैर-CP समूह की तुलना में उल्लेखनीय रूप से कम ICU में रहना दिखाया (4.73 बनाम 7.83 दिन, p<0.001), दम घुटने और चिंता स्कोर में अधिक कमी, तथा पल्मोनरी फ़ंक्शन और ABG मानों में सुधार (p<0.001) दिखाया। क्लिनिकल पाथवे का कार्यान्वयन अस्पताल में भर्ती अवधि घटाकर और श्वसन तथा मनोवैज्ञानिक परिणामों में सुधार करके AECOPD प्रबंधन को बेहतर बनाता है।
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Ahmed Mohamed Hassan
Mansoura University
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अहमद मोहम्मद हसन ने इस प्रश्न का अध्ययन किया।
www.synapsesocial.com/papers/69a75b3bc6e9836116a22337 — DOI: https://doi.org/10.5281/zenodo.18385387