सार यह अध्ययन खालाफ बिन जियाद अल-बहरानी की इबादिओं पर आधारित पत्रिका की धार्मिक बहसों की जांच करता है, जो प्रारंभिक 2/8 शताब्दी में लिखी गई थी। यह पत्रिका, जो अल-आस्माʼ वा-ल-अḥकम (नाम और निर्णय) के धार्मिक सिद्धांत पर केंद्रित है, इस्लाम मेंfaith वर्गीकरण और उनके कानूनी प्रभावों पर सबसे शुरुआती ज्ञात चर्चाओं में से एक है। खालाफ के काम की तुलना किताब अल-इरजाऽ और सालिम बिन धकवान की पत्रिका से की जाती है, यह उजागर करता है कि कैसे प्रारंभिक इस्लामी संप्रदाय, विशेषकर इबादियों, मुर्जीति और मुअतज़िलियों ने ईमान (विश्वास) और कुफ्र (अविश्वास) की परिभाषाओं पर बहस की। यह अध्ययन खालाफ की पत्रिका को उस समय के व्यापक धार्मिक संवाद में स्थापित करता है, यह दिखाते हुए कि उनके विश्वास-संबंधित निर्णयों का वर्गीकरण बाद की इबादī विचारधारा को प्रभावित करता है। यह इस धारणा को भी चुनौती देता है कि इबादियत केवल 6/12 शताब्दी में एक संरचित doktrina के रूप में पनपी, यह दर्शाते हुए कि यह प्रारंभिक इस्लामी काल से लगातार विकसित होती रही।
अब्दुर्रहमान अल-सलिमी (गुरुवार) ने इस प्रश्न का अध्ययन किया।