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एट्रियल फिब्रिलेशन (AF) एक सामान्य अरिदमिया है जिसे इलाज करना कठिन होता है। साइनस-रिदम बनाए रखने के लिए एंटी-अरिदमिक दवा चिकित्सा सीमित है क्योंकि इसकी प्रभावशीलता अपर्याप्त है और इसके गंभीर प्रतिकूल प्रभाव हो सकते हैं। एएफ-उत्पत्ति की रोकथाम के लिए नवीन चिकित्सीय दृष्टिकोणों में बढ़ती रुचि है। हाल ही के परीक्षण बताते हैं कि एंजियोटेंसिन कन्वर्टिंग-एंजाइम (ACE) अवरोधक और एंजियोटेंसिन रिसेप्टर ब्लॉकर्स (ARBs) उपयोगी हो सकते हैं, विशेष रूप से बाएं वेंट्रिकुलर हाइपरट्रोफी या विफलता वाले रोगियों में। इस दृष्टिकोण की नैदानिक संभावनाएँ और तंत्र सक्रिय रूप से अनुसंधान के अधीन हैं। एंजियोटेंसिन-II पुनःसंरचना में शामिल है और संभवतः इसके प्रत्यक्ष विद्युत-भौतिकीय प्रभाव भी होते हैं। प्रायोगिक अध्ययन ACE-इनहिबिटर्स और ARBs के साथ एट्रियल संरचनात्मक और संभवतः विद्युत पुनःसंरचना से संरक्षण दिखाते हैं, साथ ही हृदय आयन चैनलों पर संभावित प्रभाव। यह लेख ACE-इनहिबिटर्स और ARBs के नैदानिक उपयोग और क्रिया तंत्र की जानकारी की समीक्षा करता है। दैर्ध्यात्मक यादृच्छिक डबल-ब्लाइंड परीक्षणों का अभाव इनका उपयोग बिना अन्य संकेत के AF रोगियों में सीमित करता है, लेकिन चल रहे अध्ययन निकट भविष्य में इसे बदल सकते हैं। यह उत्साहजनक अनुसंधान क्षेत्र AF रोगियों के लिए चिकित्सीय विकल्पों में महत्वपूर्ण सुधार ला सकता है।
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Joachim R. Ehrlich
Stefan H. Hohnloser
Stanley Nattel
European Heart Journal
Goethe University Frankfurt
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Ehrlich et al. (Fri,) ने इस प्रश्न का अध्ययन किया।
www.synapsesocial.com/papers/6a0227fc0cec8eebbd5cc47e — DOI: https://doi.org/10.1093/eurheartj/ehi668