21वीं सदी में शिक्षा का स्वरूप तीव्र गति से बदल रहा है। सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (ICT) के विकास ने शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया को अधिक सुलभ, प्रभावी और छात्र-केंद्रित बना दिया है। इसी परिप्रेक्ष्य में डिजिटल शिक्षणशास्त्र (Digital Pedagogy) का महत्व अत्यधिक बढ़ गया है। भारत सरकार द्वारा लागू राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (NEP 2020) ने शिक्षा में डिजिटल तकनीकों के एकीकरण और शिक्षक शिक्षा के पुनर्गठन पर विशेष बल दिया है। डिजिटल शिक्षणशास्त्र आज के शिक्षा तंत्र का अभिन्न अंग बन चुका है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 ने इसे एक नई दिशा प्रदान की है, जिसमें शिक्षक शिक्षा को तकनीकी रूप से सशक्त बनाने पर विशेष बल दिया गया है। यदि डिजिटल संसाधनों का सही उपयोग किया जाए और चुनौतियों का समाधान किया जाए, तो भारत की शिक्षा प्रणाली अधिक समावेशी, सुलभ और गुणवत्तापूर्ण बन सकती है। डिजिटल शिक्षणशास्त्र (Digital Pedagogy) आधुनिक शिक्षा की वह अवधारणा है जिसमें शिक्षण–अधिगम प्रक्रिया को प्रभावी, लचीला और रोचक बनाने के लिए डिजिटल तकनीकों, उपकरणों और प्लेटफ़ॉर्म का उपयोग किया जाता है। यह केवल तकनीक का प्रयोग नहीं है, बल्कि यह इस बात पर केंद्रित है कि तकनीक के माध्यम से कैसे बेहतर सीखना संभव हो।
प्रो. छत्रसाल सिंह (Wed,) studied this question.