नई आर्थिक व्यवस्था के दौर में योग उद्योग शारीरिक मानसिक और वाणिज्यिक-तीनों स्तरों पर तीव्र गति से विकसित हो रहा है। डिजिटल माध्यमों, वेलनेस इंडस्ट्री, पर्यटन, ऑनलाइन प्रशिक्षण तथा कॉर्पोरेट सेक्टर में योग सेवाओं की बढ़ती मांग के कारण यह क्षेत्र एक व्यापक आर्थिक अवसर के रूप में उभर रहा है। ऐसे परिदृश्य में भाषा-विशेषकर हिंदी-योग के प्रसार, शिक्षा, प्रशिक्षण, बाजार विस्तार, संचार एवं उपभोक्ता पहुँच के लिए महत्वपूर्ण साधन बन कर उभरी है। यह शोधपत्र नई आर्थिक व्यवस्था में योग उद्योग के विकास, उसके सांस्कृतिक प्रभाव, आर्थिक संभावनाओं और हिंदी भाषा की भूमिका का विश्लेषण करता है।
Meenakshi Shrivastava (Sun,) studied this question.