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May 7, 2026International Journal of Novel Research and Development0 citationsOpen Access

नपल क जसमन सत सहतय

DSDilliram Sharma Sangraula

Key Points

  • लेख का उद्देश्य जोसमनी संतों और उनके साहित्यिक योगदान का विश्लेषण करना है।
  • सामाजिक और सांस्कृतिक संदर्भ में जोसमनी संतों के साहित्य का अध्ययन
  • विद्वानों द्वारा जोसमनी संतों के योगदान का मूल्यांकन
  • जोसमनी सम्प्रदाय का साहित्य हिंसा और जातिवाद के खिलाफ है।
  • जोसमनी संतों की भाषा सधुक्कडी है, जो उनके घुमक्कड़ जीवन को दर्शाती है।
  • नेपाली विद्वानों ने जोसमनी संतों के योगदान को महत्वपूर्ण मानते हुए उसे सलाम किया है।

Abstract

नेपाल एक सुन्दर देश है जो हिमालय की गोद में बसा हुआ है। यह देश सांस्कृतिक रूप से समृद्ध है। यहाँ विविध जात-जाति, भाषाभाषी, हिन्दू-बौद्ध-किरात सभी धर्म के लोग आपस में मिल कर रहते हैं। नेपाल को बहुजातीय, बहुभाषिक, बहुधार्मिक, बहुसांस्कृतिक मुल्क कहा जाता है। नेपाल के जोसमनी संतों का साहित्य पर्याप्त है। जोसमनी सम्प्रदाय हिंसा और जाति कुल के भेदभाव के विरुद्ध ही समाज में अस्तित्व में आया है। जोसमनी सम्प्रदाय में मन, वचन और कर्म से अहिंसा पर जोर दिया जाता है। ईश्वरीय आराधना को सहज और सर्वस्वीकार बनाना, समाज के पुराने रूढीगत चिन्तन को दूर करना, निर्गुण अस्तित्व को ग्रहण करना, विभेद, भ्रष्टाचार, आडम्बर, जाति प्रथा आदि का यह मत प्रत्यक्ष विरोध करता है। प्रचलित धार्मिक विश्वास में जब रूढीवादी और अनैतिक विश्वास को स्थान मिलता है, तब समाज का एक जागरूक हिस्सा अलग धार्मिक चिन्तन की ओर उन्मुख हो जाना स्वाभाविक है, जोसमनि सम्प्रदाय इसी का प्रतिफल है। इस सम्प्रदाय के सन्तों की भाषा सधुक्कडी है क्योंकि ये घुमक्कड होते हैं। नेपाल में जोसमनी सन्तों का विपुल साहित्य है। नेपाली विद्वानों ने भी जोसमनी सन्तों से नेपाली भाषा में पर्याप्त योगदान पहुँचने की बात कही है। नेपाल का हिन्दी साहित्य का आरंभ जोशमनी सन्तों की वाणी से ही माना जाता है। जनकलाल शर्मा ने जोसमनी संतों के बारे में पर्याप्त खोज की हैं। प्रस्तुत लेख में जोसमनी संतों और उनके द्वारा साहित्य में किए गए योगदान के बारे में विश्लेषण करना ही इसका उद्देश्य है।

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Cite This Study

Dilliram Sharma Sangraula (2026) studied this question.

synapsesocial.com/papers/69fc2b158b49bacb8b34765chttps://doi.org/10.56975/ijnrd.v11i2.312381
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