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January 23, 20260 citationsOpen Access

कवप क अनदत उपनयस म ससकतक समतलयत

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रजराजशेखर उमेश जाधव

Key Points

  • यह अध्ययन कन्नड़ साहित्यकार कुवेंपु के उपन्यासों में सांस्कृतिक समतुल्यता का विश्लेषण करता है।
  • कन्नड़ उपन्यासों के हिंदी अनुवाद का तुलना करना
  • विभिन्न सांस्कृतिक संदर्भों का विश्लेषण करना
  • ग्राम कर्नाटक के धार्मिक संदर्भों की पहचान करना
  • अनुवादकों ने सामाजिक और सांस्कृतिक परिवेश को सुरक्षित रखा है।
  • सांस्कृतिक प्रतिस्थापन ने ग्रामीण कर्नाटक के संदर्भ को जीवंत किया है।
  • अनुवाद ने भारतीय साहित्य को समृद्ध किया है।

Abstract

प्रस्तुत शोध पत्र कन्नड़ साहित्यकार कुवेंपु के हिंदी अनूदित उपन्यासों में &सांस्कृतिक समतुल्यता* की अवधारणा का विश्लेषण करता है। यह अध्ययन दर्शाता है कि कैसे अनुवादक ने शाब्दिक अनुवाद से परे जाकर मूल पाठ के सामाजिक और सांस्कृतिक परिवेश को सुरक्षित रखा है। &हच्चे* के लिए &गोदना* और &तुलसीकट्टे* के लिए &वृंदावन* जैसे उदाहरणों के माध्यम से यह स्पष्ट किया गया है कि सांस्कृतिक प्रतिस्थापन हिंदी पाठकों के लिए ग्रामीण कर्नाटक के धार्मिक और लोक संदर्भों को जीवंत बनाए रखता है। निष्कर्षतः, ये अनुवाद भाषाई सीमाओं को पाटते हुए भारतीय साहित्य को समृद्ध करते हैं और लक्ष्य भाषा में मूल भावों को प्रभावी ढंग से संप्रेषित करते हैं।

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Cite This Study

राजशेखर उमेश जाधव (2026) studied this question.

synapsesocial.com/papers/69730ef2c8125b09b0d1ebfehttps://doi.org/10.5281/zenodo.18330748
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