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April 25, 20260 citationsOpen Access

भरतय दड सहत एव वशष वधन क अतरगत महलओ क सरकषण: एक समलचनतमक एव समजक-वधक अधययन

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HPHema PancholiDTDr. Nidhi Tyagi

Key Points

  • शोध-पत्र का उद्देश्य भारत में महिलाओं के विरुद्ध अपराधों और उनके संरक्षण में विधिक प्रावधानों का विश्लेषण करना है।
  • भारतीय दंड संहिता, नवीन आपराधिक कानून और विशेष अधिनियमों का अध्ययन किया गया।
  • नवीनतम अपराध आँकड़ों और न्यायिक दृष्टिकोण का विश्लेषण किया गया।
  • क्रियान्वयन संबंधी चुनौतियों की जांच की गई।
  • विधिक ढांचा व्यापक है, लेकिन प्रभावी क्रियान्वयन की कमी है।
  • सामाजिक जागरूकता के अभाव में अपेक्षित परिणाम प्राप्त नहीं हो रहे हैं।
  • विशेष अधिनियमों का कार्यान्वयन प्रभावी नहीं है।

Abstract

भारत में महिलाओं के विरुद्ध अपराध सामाजिक-आर्थिक, सांस्कृतिक तथा संरचनात्मक कारकों से प्रभावित होते हैं। महिलाओं की गरिमा, सुरक्षा और समानता सुनिश्चित करने हेतु दंडात्मक और संरक्षणात्मक दोनों प्रकार के विधिक प्रावधान विकसित किए गए हैं। यह शोध-पत्र भारतीय दंड संहिता तथा नवीन आपराधिक कानून भारतीय न्याय संहिता के साथ-साथ प्रमुख विशेष अधिनियमों—घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम, दहेज निषेध अधिनियम तथा कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन उत्पीड़न (रोकथाम, प्रतिषेध एवं प्रतितोष) अधिनियम—का समालोचनात्मक अध्ययन प्रस्तुत करता है। अध्ययन में नवीनतम अपराध आँकड़ों, न्यायिक दृष्टिकोण तथा क्रियान्वयन संबंधी चुनौतियों का विश्लेषण किया गया है। निष्कर्षतः यह पाया गया कि विधिक ढांचा व्यापक है, किंतु प्रभावी क्रियान्वयन और सामाजिक जागरूकता के अभाव में अपेक्षित परिणाम प्राप्त नहीं हो पा रहे हैं।

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Cite This Study

Pancholi et al. (2026) studied this question.

synapsesocial.com/papers/69ec5b8a88ba6daa22dad1bfhttps://doi.org/10.5281/zenodo.19711082
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