PulseExploreJournal ClubDebatesTrendingResearchersJournals
Instagram
HomeExploreJournal ClubTrending
Synapse
⌘+K
Synapse
January 23, 20260 citationsOpen Access

भरतय भष परवर और रषटरय एकत

View Full Paper
मगमहादेवी गुरव

Key Points

  • इस शोध का मुख्य उद्देश्य भारतीय भाषाओं और राष्ट्रीय एकता के बीच के संबंधों को समझना है.
  • भाषाई परिवारों का विश्लेषण
  • संविधानिक प्रावधानों का अध्ययन
  • त्रिभाषा सूत्र की समीक्षा
  • साहित्यिक कार्यों का विवेचन
  • भाषा भारतीय संस्कृति और अस्मिता का अभिव्यक्ति का साधन है.
  • हिंदी को देश की संपर्क और राजभाषा के रूप में महत्वपूर्ण माना गया.
  • भाषाई समन्वय से 'अनेकता में एकता' की अवधारणा को सशक्त किया जा सकता है.

Abstract

प्रस्तुत शोध आलेख में भारतीय भाषा परिवारों और राष्ट्रीय एकता के अटूट संबंधों का विवेचन किया गया है। लेखिका ने रेखांकित किया है कि भाषा केवल अभिव्यक्ति का साधन न होकर भारतीय संस्कृति और राष्ट्रीय अस्मिता की संवाहक है। इसमें हिंदी को संपर्क एवं राजभाषा के रूप में देश को जोड़ने वाली महत्वपूर्ण कड़ी माना गया है। आलेख में संवैधानिक प्रावधानों, त्रि-भाषा सूत्र, तकनीकी अनुवाद और साहित्य (विशेषकर रामकथा और जयशंकर प्रसाद के साहित्य) की भूमिका पर प्रकाश डाला गया है। निष्कर्षतः, यह लेख सिद्ध करता है कि भारत की ‘अनेकता में एकता’ की अवधारणा को सशक्त बनाने में भाषाई समन्वय और साहित्यिक परंपराओं का योगदान सर्वोपरि है।

Ask AI
Helpful
Bookmark
Share
View Full Paper

Cite This Study

महादेवी गुरव (2026) studied this question.

synapsesocial.com/papers/69731047c8125b09b0d1ff3bhttps://doi.org/10.5281/zenodo.18330639
Ask AI
Helpful
Bookmark
Share
View Full Paper