वर्तमान समय में जलवायु परिवर्तन वैश्विक स्तर पर मानव समाज और प्राकृतिक पारिस्थितिकी के लिए एक गंभीर चुनौती के रूप में सामने खड़ी है। औद्योगिकीकरण, तीव्र शहरीकरण तथा संसाधनों के अनियंत्रित दोहन के कारण पर्यावरणीय संतुलन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। ऐसे समय में यह प्रश्न महत्वपूर्ण हो जाता है कि क्या केवल आधुनिक तकनीकी समाधान जलवायु संकट का सामना करने के लिए पर्याप्त हैं। भारत के संदर्भ में यह विमर्श और अधिक महत्वपूर्ण हो जाता है, क्योंकि यहाँ प्रकृति के साथ सह-अस्तित्व की समृद्ध परंपरा रही है, जिसे \\\'भारतीय ज्ञान प्रणाली\\\' के रूप में जाना जाता है।\यह शोध-पत्र भारतीय ज्ञान परंपरा के पर्यावरणीय दृष्टिकोण तथा भारत सरकार की जलवायु नीतियों का तुलनात्मक और समन्वयात्मक विश्लेषण प्रस्तुत करता है। अध्ययन से यह स्पष्ट होता है कि यदि पारंपरिक ज्ञान, स्थानीय समुदायों के अनुभव तथा आधुनिक वैज्ञानिक नीतियों के बीच समन्वय स्थापित किया जाए, तो जलवायु परिवर्तन से निपटने की रणनीतियाँ अधिक प्रभावी और टिकाऊ हो सकती हैं।\
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विवेक कुमार
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विवेक कुमार (Thu,) studied this question.
www.synapsesocial.com/papers/69d895206c1944d70ce06163 — DOI: https://doi.org/10.5281/zenodo.19448813